सरगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नगर पंचायत क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के बावजूद मात्र एक रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। यहां मामूली बीमारियों में भी मरीजों को सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया जाता है। सबसे अधिक दिक्कत गर्भवती महिलाओं को होती है, जिन्हें उचित इलाज न मिलने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
गर्भवती महिलाओं के लिए परेशानी का सबब
सरगांव अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए हर महीने की 9 और 24 तारीख को निशुल्क जांच और उपचार की व्यवस्था की गई है, लेकिन यह सिर्फ कागजों तक सीमित है। क्षेत्र की एकमात्र महिला चिकित्सक डॉ. शबाना परवीन ही प्रभारी हैं, लेकिन उनकी अनुपस्थिति के कारण महिलाओं को पुरुष डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ता है। ग्रामीण परिवेश की महिलाएं इस कारण संकोच महसूस करती हैं और सही तरीके से इलाज नहीं ले पातीं।
लंबे इंतजार के बाद भी नहीं मिलता इलाज
इलाज के लिए तय तिथियों पर अस्पताल में भारी भीड़ हो जाती है। जांच के लिए आईं गर्भवती महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है। नमूने देने के बाद रिपोर्ट आने में देरी होती है और डॉक्टर भी अनुपस्थित रहते हैं। गर्भवती महिलाओं को गर्भ में पल रहे शिशु के साथ घंटों तक डॉक्टर का इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
स्थानीय प्रशासन ने भी जताई चिंता
नगर पंचायत अध्यक्ष परमानंद साहू ने कहा, “सरगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। कुशल और अनुभवी डॉक्टरों की कमी के कारण क्षेत्र की महिलाओं को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सा अधिकारियों को जल्द से जल्द इस ओर ध्यान देना चाहिए।” और
शासन-प्रशासन को जल्द कदम उठाने की जरूरत
स्वास्थ्य केंद्र में महिला डॉक्टर की कमी गंभीर समस्या बन गई है। बीएमओ अनुजराम बजारे ने स्वीकार किया कि एक ही महिला डॉक्टर होने के कारण वह हर जगह उपलब्ध नहीं हो सकतीं। शासन-प्रशासन को इस समस्या का समाधान निकालना होगा।
सरगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को महज रेफरल सेंटर बनाकर छोड़ना, शासन की लापरवाही को दर्शाता है। स्वास्थ्य विभाग को तत्काल यहां एक और महिला चिकित्सक की नियुक्ति करनी चाहिए ताकि गर्भवती महिलाओं को सही समय पर इलाज मिल सके और उनकी जान जोखिम में न पड़े।