बिल्हा (बिलासपुर)। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2019 में शासकीय कर्मचारियों के लिए निर्मित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनियाँ आज खुद सरकारी लापरवाही का प्रतीक बन चुकी हैं। बिल्हा विकासखण्ड मुख्यालय स्थित 44 शासकीय आवासों वाली हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी बीते 6 वर्षों से पूरी तरह उपेक्षित है, जबकि इसका रखरखाव शासन आदेशानुसार लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन है।

किंतु निर्माण के 6 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कॉलोनी में आज तक भवनों की मरम्मत, पुताई एवं नियमित अनुरक्षण कार्य नहीं कराए गए हैं, जो संबंधित विभाग की गंभीर उदासीनता को उजागर करता है। रखरखाव के अभाव में कॉलोनी की स्थिति अब अत्यंत जर्जर, असुरक्षित और खतरनाक हो चुकी है। भवनों की दीवारों में गहरी सीलन, जगह-जगह से प्लास्टर का झड़ना, छतों से पानी टपकना और संरचनात्मक क्षति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। हालात ऐसे हैं कि किसी भी समय बड़ा हादसा घटित हो सकता है।
कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह चरमरा चुकी है। वर्षों से नालियों की सफाई न होने के कारण गंदगी और जलभराव बना रहता है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। आंतरिक सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं, वहीं स्ट्रीट लाइट और विद्युत व्यवस्था भी अधिकांश समय ठप रहती है, जिससे विशेषकर रात्रि में असुरक्षा का माहौल बना रहता है।
विडंबना यह है कि जिन शासकीय कर्मचारियों से शासन व्यवस्था को सुचारु रखने की अपेक्षा की जाती है, वही कर्मचारी और उनके परिवार आज बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
जनहित में बड़ा सवाल यह है कि क्या शासकीय आवासों का रखरखाव शासन और लोक निर्माण विभाग की प्राथमिकता में नहीं है? यदि समय रहते मरम्मत, पुताई एवं नियमित रखरखाव कार्य प्रारंभ नहीं किए गए, तो किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों की होगी।
कॉलोनीवासियों ने शासन एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि लोक निर्माण विभाग को तत्काल निर्देशित कर बिल्हा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में शीघ्र मरम्मत, पुताई एवं नियमित अनुरक्षण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि वर्षों से उपेक्षित इस कॉलोनी को बदहाली से बचाया जा सके।















