उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र हथनी, बिल्हा में विद्यार्थियों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करने हेतु मटका खाद निर्माण किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को प्राकृतिक एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती की तकनीकों से परिचित कराना था।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. तोरन साहू ने मटका खाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह तकनीक मृदा की उर्वरता बढ़ाने, सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को प्रोत्साहित करने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायक है।
शैक्षणिक प्रभारी डॉ. राकेश गिरी गोस्वामी ने विद्यार्थियों को मटका खाद निर्माण की विधि, उसके लाभ एवं फसलों में प्रयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मटका खाद कम लागत में तैयार होने वाली प्रभावी जैविक खाद है, जो टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देती है।
इस दौरान छात्र-छात्राओं ने स्वयं मटका खाद तैयार कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया और जैविक खेती के महत्व को समझा। विद्यार्थियों ने इस गतिविधि में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस अवसर पर श्रीमति पुष्पांजलि पंकज,डॉ. संध्या साहू , डॉ. मकसूदन वर्मा उपस्थित रहे।
उद्यानिकी महाविद्यालय हथनी, बिल्हा के छात्रों ने मटका खाद बनाकर जैविक खेती का महत्व जाना