सरगांव। रामबोड़ स्थित कुसुम स्मेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड में एक बार फिर औद्योगिक दुर्घटना होने से प्लांट की सुरक्षा व्यवस्थाओं और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गुरुवार सुबह मेंटेनेंस कार्य के दौरान हुए हादसे में तीन कर्मचारी झुलस गए। जिसमें 2 कर्मचारियों का बिलासपुर में उपचार जारी है। तथा एक की हालत नाजुक होने पर बेहतर उपचार के लिए रायपुर रेफर किया गया है।
हालांकि सभी घायलों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं ने क्षेत्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार कीलन डिस्चार्ज गेट के मेंटेनेंस के दौरान अचानक गेट खुल जाने से गर्म स्पंज आयरन की चपेट में आकर तीन कर्मचारी घायल हो गए। घटना के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, घायलों की पहचान अमित कुमार (बिहार), योगेश मीणा (मध्य प्रदेश) और अमरेश दत्ता (ओडिशा) के रूप में हुई है।
लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि यदि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा था तो मेंटेनेंस के दौरान ऐसी गंभीर चूक कैसे हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुसुम प्लांट में यह पहला हादसा नहीं है। पूर्व में भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें श्रमिकों की जान तक गई है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। हर घटना के बाद जांच और कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन हादसों की पुनरावृत्ति यह संकेत देती है कि जमीनी स्तर पर सुधार प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं। प्लांट में बार-बार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा कड़ी निगरानी और जवाबदेही तय नहीं की जा रही है। लगातार हो रहे हादसों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर श्रमिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा और कब तक जांच के नाम पर मामलों को ठंडे बस्ते में डाला जाता रहेगा।
हादसों का पर्याय बन चुका प्लांट, अब फिर होना है विस्तार, 10 जुलाई को प्रस्तावित जनसुनवाई, ग्रामीणों ने उठाए सुरक्षा और प्रदूषण के सवाल..
मुंगेली जिले के सरगांव तहसील अंतर्गत ग्राम धमनी स्थित कुसुम स्मेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित विस्तार को लेकर क्षेत्र में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। कंपनी के विस्तार प्रस्ताव पर आगामी 10 जुलाई को जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, लेकिन इससे पहले ही स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने कई गंभीर मुद्दे उठाते हुए विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुसुम स्मेल्टर्स का नाम बीते वर्षों में कई औद्योगिक हादसों से जुड़ चुका है। प्लांट में हुई दुर्घटनाओं में श्रमिकों की मौत और कर्मचारियों के घायल होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में बिना मौजूदा समस्याओं का समाधान किए प्लांट विस्तार का प्रस्ताव लोगों को स्वीकार्य नहीं है।
ज्ञात हो कि प्लांट से निकलने वाले धुएं और अन्य औद्योगिक उत्सर्जनों का असर आसपास के गांवों के पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसके अलावा भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से क्षेत्र की सड़कें एक बार फिर जर्जर हो जाएगी, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पहले सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए, प्रदूषण नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए । इसके बाद ही प्लांट विस्तार पर विचार किया जाना चाहिए।
बताया जा रहा है कि आगामी जनसुनवाई में ग्रामीण इन सभी मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहे हैं। जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज है और बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही
बता दे कि क्षेत्र में वर्षों बाद स्थानीय विधायक धरमलाल कौशिक के प्रयासों से सड़क का निर्माण हुआ है। लेकिन प्लांट विस्तार के बाद भारी वाहनों की (ओवरलोड) आवाजाही बढ़ने से सड़क के दोबारा जर्जर होने की आशंका है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो ग्रामीणों को फिर से खराब सड़कों की परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
