पहले 12 मवेशियों की हो चुकी थी मौत, अब किसान की जान गई; ग्रामीणों ने एफआईआर, मुआवजा और सुरक्षा ऑडिट की उठाई मांग
सरगांव// ग्राम पंचायत बिदबिदा में झूलते और जर्जर 11 केवी बिजली तार की चपेट में आने से एक किसान की मौत के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे से पहले कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें किए जाने के बावजूद विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि समय रहते बिजली लाइन की मरम्मत या उसे सुरक्षित ऊंचाई पर कर दिया जाता तो किसान की जान बचाई जा सकती थी।

समय रहते कार्रवाई होती तो बच सकती थी जान
ग्राम पंचायत बिदबिदा के सरपंच अनिल राजपूत ने बताया कि गांव के किसानों के साथ मिलकर झूलते और जर्जर बिजली तारों की समस्या को लेकर कई बार सरगांव के कनिष्ठ यंत्री को लिखित एवं मौखिक शिकायत दी गई थी। इसके बावजूद विभाग ने समस्या का समाधान नहीं किया। उन्होंने कहा कि लगातार अनदेखी के कारण आखिरकार एक किसान को अपनी जान गंवानी पड़ी।
पहले भी हो चुकी थीं दुर्घटनाएं
ग्रामीणों के अनुसार, इसी झूलती बिजली लाइन की वजह से पहले भी करीब 12 मवेशियों की मौत हो चुकी थी। इसके बावजूद विभाग ने लाइन की मरम्मत या खंभों को दुरुस्त कराने की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही ने एक और बड़ा हादसा होने दिया।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
घटना के बाद पूरे गांव में बिजली विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों एवं सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि मृतक किसान के परिजनों को शीघ्र पूर्ण मुआवजा दिया जाए, लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए तथा पूरे क्षेत्र में झूलते और जर्जर बिजली तारों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कर आवश्यक सुधार कार्य कराया जाए।
बिजली विभाग का पक्ष
सरगांव के कनिष्ठ यंत्री खगेश नेताम ने बताया कि लगातार बारिश के कारण बिजली का खंभा झुक गया था, जिससे 11 केवी लाइन नीचे आ गई और यह दुर्घटना हुई। उन्होंने बताया कि मृतक के परिजनों को तत्काल 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है तथा नियमानुसार लगभग 4 लाख रुपये का मुआवजा भी उपलब्ध कराया जाएगा।
लापरवाही पर उठे सवाल
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग पूर्व में मिली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए समय पर सुधार कार्य करता, तो यह हादसा टाला जा सकता था। किसान की मौत के बाद बिजली विभाग की रखरखाव व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
