बिल्हाः- इस अवसर पर संस्था के संचालक द्वारा माँ सरस्वती एवं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिमा पर पुष्पहार चढ़ाकर पूजा अर्चना की गयी। इसके उपरांत उपस्थित छात्र-छात्राओं के द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा का पूजा अर्चना की गयी। इस अवसर पर संस्था के संचालक सुखनन्दन प्रसाद ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन महान शिक्षाविद्, दर्शनिक, वक्ता, विचारक एवं भारतीय संस्कृति के ज्ञानी विलक्षण प्रतिभा के धनी थें, भारत को शिक्षा के क्षेत्र में नई उँचाई पर ले जाने वाले महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिन प्रतिवर्ष 5 सितम्बर को शिक्षकों के सम्मान के रूप में मनाया जाता है, उन्होने कहा कि व्यक्तित्व के विकास का प्रथम सोपान बेहतर शिक्षा है। यदि बच्चे का बेहतर व्यक्तित्व गढ़ना है, तो उसे मिलने वाले शिक्षा को बेहतर बनाना होगा। व्यक्तित्व का विकास शिक्षा से शुरू होता है। शिक्षा का एक मात्र उदेश्य भी यही होना चाहिए कि बच्चे के व्यक्तित्व को बहुमुखी आयाम दिया जाये। शिक्षा वह है जो मनुष्य को ज्ञान प्रदान करने के साथ साथ उसके हृदय व आत्मा का विकास करती है। उद्बोधन के पश्चात छात्र-छात्राओं ने गुरूजनों के मस्तक पर तिलक लगाकर सम्मान स्वरूप उपहार भेंट किये। इस अवसर पर श्री अशोक पाटले, श्री संतोष डहरिया, संस्था प्रभारी किरण बंजारे, शिक्षक विजेन्द्र कुमार, रिनेश कुमार एवं दिपक पाटले, विवेक पाटले, प्रदीप कुर्रे, प्रदीप नोनिया, चन्द्रकांत, ऋषि, राजाबाबू, सुभाष, चन्दशेखर, गौतम कोशले, उमाशंर, होरी लाल, अरून कुमार, दिनेश, पुरषोत्तम, सलिम, पनिश, गुलशन, विनायक, ईशा मनहर, दिव्या बंजारे, सिमरन यादव, वैशाली शर्मा, पूर्णिमा कौशिक, वन्दना, अदिती मधुकर, प्रिया गेंदले, प्रिया, रिया, जिया, लेखा, सोनम, रोशनी, रूखमणी, निलेश्वरी, श्रुति, कंचन, महेश्वरी, जागृति, सपना, इन्द्रावति, आरती, जलेश्वरी, नीलम, अन्य छात्र-छात्रायें उपस्थित थे।





















