छत्तीसगढ़ में जिला सहकारी बैंकों की व्यवस्था को लेकर किसानों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। किसानों का आरोप है कि बैंक में जमा उनकी खुद की मेहनत की कमाई निकालने के लिए उन्हें घंटों धूप में लाइन लगानी पड़ रही है, इसके बावजूद भी कई बार उन्हें बिना पैसा लिए वापस लौटना पड़ता है।
बताया जा रहा है कि जिला सहकारी बैंक में एक दिन में मात्र 20,000 रुपये तक ही निकासी की सीमा तय कर दी गई है, जिससे किसानों को अपने ही पैसे निकालने के लिए कई दिनों तक चक्कर लगाना पड़ रहा है।
स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब बैंक द्वारा जारी एटीएम कार्ड भी काम नहीं कर रहे हैं। कई किसानों का कहना है कि एटीएम सुविधा को या तो बंद कर दिया गया है या फिर तकनीकी कारणों से ब्लॉक कर दिया गया है, जिससे डिजिटल माध्यम से पैसे निकालने का विकल्प भी खत्म हो गया है।
किसानों को मजबूरी में बैंक शाखा के बाहर लंबी कतारों में खड़े होकर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। तेज धूप और गर्मी में बुजुर्ग एवं महिला किसानों को विशेष रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग व्यवस्था की यह स्थिति राज्य सरकार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। किसानों का कहना है कि जब सरकार किसानों के हित की बात करती है, तो उन्हें अपने ही पैसे निकालने के लिए इस तरह की परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि: निकासी सीमा को बढ़ाया जाए ,एटीएम सेवाओं को तत्काल चालू किया जाए , बैंक शाखाओं में अतिरिक्त काउंटर और स्टाफ की व्यवस्था की जाए ,ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग व्यवस्था को सुचारू बनाया जाए















