सरगांव। नगर पंचायत सरगांव के वार्ड क्रमांक 7 में 1 जून को होने वाले पार्षद उपचुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार अभियान को धार दे दी है। डोर-टू-डोर जनसंपर्क, बैठकें और मतदाताओं से सीधा संवाद कर नेताओं द्वारा अपने पक्ष में मतदान की अपील की जा रही है। यह उपचुनाव वार्ड के पूर्व पार्षद राजकुमारी कौशिक के निधन के कारण कराया जा रहा है। भाजपा ने उनकी बहू पूजा कौशिक को उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस ने मालती दुखहरन यादव पर दोबारा भरोसा जताते हुए चुनाव मैदान में उतारा है। मालती यादव पिछले चुनाव में भाजपा की दिवंगत प्रत्याशी राजकुमारी कौशिक से 75 मतों के अंतर से पराजित हुई थीं।
शुक्रवार देर शाम बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक ने वार्ड में आयोजित बैठक में सैकड़ों मतदाताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वार्ड के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए भाजपा प्रतिबद्ध है। राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने मतदाताओं से भाजपा प्रत्याशी पूजा कौशिक को विजयी बनाकर विकास की गति को बनाए रखने की अपील की। विधायक ने कहा कि स्वर्गीय राजकुमारी कौशिक ने वार्ड के विकास के लिए निरंतर कार्य किया और उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पूजा कौशिक को समर्थन देना आवश्यक है।
जनसंपर्क के दौरान नरेंद्र शर्मा, ज्योति दुबे, दीनानाथ केसरवानी, कैलाश ठाकुर, अंबालिका साहू, परमानंद साहू, रणजीत हुरा, पोषण यादव, पंकज वर्मा आदि मौजूद रहें।
वहीं शनिवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने कांग्रेस प्रत्याशी मालती दुखहरन यादव के समर्थन में जनसंपर्क किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश और नगर स्तर पर भाजपा सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में काफी अंतर है। वार्ड की जनता आज भी कई मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन उनके समाधान के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों ने जनता से किए गए कई वादों को पूरा नहीं किया है, जिससे लोगों में नाराजगी है। देवेंद्र यादव ने कहा कि कांग्रेस जनता के मुद्दों को लेकर हमेशा संघर्ष करती रही है और वार्ड क्रमांक 7 में भी जनता बदलाव का मन बना चुकी है। उन्होंने मतदाताओं से कांग्रेस प्रत्याशी मालती दुखहरन यादव को विजयी बनाकर एक जवाबदेह और जनहितैषी नेतृत्व चुनने की अपील की। जनसंपर्क के दौरान सियाराम कौशिक, राजेंद्र शुक्ला, घनश्याम वर्मा, लक्ष्मीनाथ साहू, नेहरू साहू, दिलीप कौशिक, मुकेश साहू, कृष्णा साहू, दबेश साहू, राकेश साहू आदि मौजूद रहें।
उपचुनाव को लेकर वार्ड में चुनावी माहौल गर्म है। दोनों प्रमुख दलों के नेता लगातार मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं। अब सभी की नजर 1 जून को होने वाले मतदान और उसके परिणाम पर टिकी हुई है।
संशोधित मतदाता सूची बदल सकते है चुनावी समीकरण
नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 7 में होने वाला पार्षद उपचुनाव इस बार बेहद रोचक और कांटे की टक्कर वाला माना जा रहा है। हाल ही में हुए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान वार्ड से बाहर निवास करने वाले 26 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। पहले 365 मतदाता थे, अब 339 मतदाता हो गये है।
इसके बाद स्थानीय मतदाताओं का महत्व काफी बढ़ गया है और चुनावी समीकरण भी बदल गए हैं। भाजपा समर्थकों का कहना है कि दिवंगत पूर्व पार्षद राजकुमारी कौशिक एवं रामकुमार कौशिक ने अपने कार्यकाल में वार्ड के विकास के लिए लगातार प्रयास किए। उनकी बहू एवं भाजपा प्रत्याशी पूजा कौशिक को सहानुभूति के साथ-साथ विकास कार्यों की निरंतरता के नाम पर समर्थन मिल रहा है। वहीं कांग्रेस समर्थकों का दावा है कि कांग्रेस प्रत्याशी मालती दुखहरन यादव लंबे समय से वार्ड की समस्याओं को उठाती रही हैं। पिछले चुनाव में कम अंतर से मिली हार और वार्ड में यादव समाज की अच्छी संख्या को देखते हुए इस बार उनके पक्ष में माहौल बनने की बात कही जा रही है। वहीं राजनीतिक जानकारों के अनुसार संशोधित मतदाता सूची के बाद इस बार मुकाबला बेहद रोचक और कांटे की टक्कर का माना जा रहा है, जहां प्रत्येक वोट निर्णायक साबित हो सकता है।
उपचुनाव में मुद्दों की गूंज, वार्डवासियों में नाराजगी
उपचुनाव के बीच वार्डवासियों का आक्रोश खुलकर सामने आ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित धांधली, समय पर किस्त नहीं मिलने, पेयजल संकट, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
चुनाव अब केवल प्रत्याशियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक समीकरण भी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। भाजपा की ओर से क्षेत्रीय विधायक कौशिक प्रचार की कमान संभाले हुए हैं, वहीं कांग्रेस की तरफ से देवेंद्र यादव मैदान में सक्रिय हैं।
ऐसे में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि उपचुनाव में कौशिक समाज का प्रभाव भारी पड़ता है या यादव समाज का समर्थन चुनावी नतीजों की दिशा तय करेगा।
