ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड दस्तावेजों में अनियमितता का आरोप, कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच और वसूली की मांग
मुंगेली/लोरमी। जनपद पंचायत लोरमी अंतर्गत ग्राम पंचायत कोयलारी में 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामले को लेकर कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत प्रस्तुत की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पंचायत द्वारा विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर किए गए भुगतानों के समर्थन में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर ऐसे बिल एवं दस्तावेज अपलोड किए गए हैं जो अपूर्ण, संदिग्ध तथा कई मामलों में कोरे प्रतीत होते हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि इन दस्तावेजों में सामग्री का विवरण, मात्रा, दर, कुल राशि तथा अन्य आवश्यक वित्तीय जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है, इसके बावजूद लाखों रुपये का भुगतान किया गया।

शिकायतकर्ता एवं छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ के मुंगेली जिला उपाध्यक्ष हरजीत भास्कर ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के नाम पर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया है और भुगतान प्रक्रिया में वित्तीय नियमों एवं पारदर्शिता संबंधी प्रावधानों की अनदेखी की गई है।
👉क्या है पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार ग्राम पंचायत कोयलारी में 15वें वित्त आयोग की राशि से विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए भुगतान किए गए। इन भुगतानों से संबंधित दस्तावेजों का ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अवलोकन करने पर कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पोर्टल पर अपलोड कई बिलों में आवश्यक जानकारियां ही उपलब्ध नहीं हैं। कुछ बिलों में सामग्री का नाम, खरीद की मात्रा, दर और कुल भुगतान राशि स्पष्ट नहीं है, जबकि कुछ दस्तावेज अधूरे अथवा संदिग्ध प्रतीत होते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि भुगतान के समर्थन में वैध और पूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे, तो आखिर सरकारी राशि किस आधार पर जारी की गई।
👉भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल,
मामले में सबसे बड़ा प्रश्न भुगतान की वैधता को लेकर खड़ा हुआ है। शिकायत में कहा गया है कि किसी भी शासकीय भुगतान के लिए निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुसार पूर्ण बिल, वाउचर, माप पुस्तिका, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र तथा अन्य आवश्यक अभिलेखों का होना अनिवार्य है।
यदि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड दस्तावेज वास्तव में अपूर्ण या कोरे हैं, तो यह केवल दस्तावेजी त्रुटि नहीं बल्कि वित्तीय प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही अथवा संभावित अनियमितता का संकेत हो सकता है। इससे यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं बिना पर्याप्त सत्यापन के भुगतान तो नहीं कर दिया गया।
👉तत्कालीन सचिव और सरपंच की भूमिका पर जांच की मांग,
शिकायत में ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव तातूराम कौशिक, सरपंच श्रीमती कली तिलगाम तथा भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि पंचायत में वित्तीय निर्णय सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। ऐसे में यदि दस्तावेजों में अनियमितता पाई जाती है तो यह पता लगाया जाना आवश्यक होगा कि भुगतान प्रस्ताव किसने तैयार किया, बिलों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और अंतिम स्वीकृति किसके द्वारा दी गई।
👉ई-ग्राम स्वराज पोर्टल की पारदर्शिता पर भी प्रश्न,
केंद्र और राज्य सरकार द्वारा पंचायतों में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से ई-ग्राम स्वराज पोर्टल संचालित किया जा रहा है। इस पोर्टल का उद्देश्य पंचायतों के वित्तीय लेनदेन, विकास कार्यों और भुगतान संबंधी जानकारी को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना है।
लेकिन यदि पोर्टल पर अपलोड किए गए दस्तावेज ही नियमों के अनुरूप नहीं हैं और उनके आधार पर भुगतान हो जाता है, तो इससे पोर्टल की निगरानी व्यवस्था तथा सत्यापन तंत्र की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यदि अपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर भुगतान हो रहा है तो यह पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
👉तकनीकी एवं वित्तीय जांच की मांग,
शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की केवल दस्तावेजी जांच तक सीमित न रखा जाए बल्कि तकनीकी और वित्तीय दोनों स्तरों पर विस्तृत जांच कराई जाए।
इसके अंतर्गत निम्न बिंदुओं की जांच की मांग की गई है—
15वें वित्त आयोग की राशि से किए गए सभी भुगतानों का परीक्षण।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड बिलों एवं वाउचरों का सत्यापन।
भुगतान से संबंधित मूल अभिलेखों की जांच।
संबंधित कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन।
खरीदी गई सामग्री की वास्तविक उपलब्धता की जांच।
भुगतान स्वीकृति प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका का परीक्षण।
वित्तीय नियमों के पालन की समीक्षा।
👉 राशि वसूली और कार्रवाई की मांग,
शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है तो दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध पंचायत राज अधिनियम, वित्तीय नियमों एवं अन्य लागू प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
साथ ही जिन भुगतानों को नियम विरुद्ध या संदिग्ध पाया जाए, उनकी राशि संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों से वसूल की जाए ताकि सरकारी धन की क्षति की भरपाई हो सके।
👉 ग्रामीणों में चर्चा का विषय बना मामला,
कोयलारी पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद यह मामला ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों को विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि जनहित के लिए होती है और उसके उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक है।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और पंचायत व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बना रहे।
👉 जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें,
मामले को लेकर अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हुई हैं। शिकायत जनदर्शन में प्रस्तुत किए जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन जांच के लिए क्या कदम उठाता है और संबंधित विभाग को क्या निर्देश दिए जाते हैं।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला पंचायत स्तर पर वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर सकता है। वहीं यदि जांच में आरोप निराधार साबित होते हैं तो संबंधित पक्षों को भी राहत मिल सकती है।
फिलहाल शिकायतकर्ता हरजीत भास्कर ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा सरकारी राशि की वसूली सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा है कि पंचायतों में वित्तीय अनुशासन और जनहित की रक्षा के लिए ऐसे मामलों में त्वरित एवं पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक है।
