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पेयजल अनुमति की आड़ में खेत में बोर खनन! ग्रामीणों ने अधिकारियों की मिलीभगत का लगाया आरोप

पथरिया/सरगांव। विकासखंड पथरिया, तहसील सरगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत दरुवनकांपा के आश्रित ग्राम लमती में रात के समय किए गए बोर खनन को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस बोर खनन के लिए अनुमति दिखाई जा रही है, वह दस्तावेज़ केवल पेयजल प्रयोजन के लिए जारी किया गया है, जबकि वास्तविकता में बोर खनन खेत में कृषि उपयोग के लिए किया गया है


ग्रामीणों के अनुसार बाहर से आई बोर मशीनों द्वारा रात में खुलेआम खनन कार्य किया गया। जब ग्रामीणों ने संबंधित व्यक्तियों से अनुमति पत्र दिखाने को कहा, तब जो दस्तावेज़ प्रस्तुत किया गया उसमें स्पष्ट रूप से पेयजल प्रयोजन हेतु नलकूप खनन की अनुमति दर्ज थी। इससे यह सवाल उठ रहा है कि यदि अनुमति पेयजल के लिए है तो खेत में कृषि उपयोग के लिए बोर खनन किस आधार पर किया जा रहा है।


ग्रामीणों का कहना है कि बिना स्थल निरीक्षण किए ही अनुमति जारी कर दी गई है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी कार्यालय में बैठे-बैठे बोर गाड़ी के दलालों के माध्यम से अनुमति दे रहे हैं, जबकि मौके की वास्तविक स्थिति की जांच नहीं की जा रही है। ग्रामीणों ने इसे शासन-प्रशासन के नियमों की खुली अनदेखी बताते हुए अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।


  स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात में शिकायत करने के बावजूद न तो संबंधित अधिकारी फोन उठाते हैं और न ही मौके पर कोई कार्रवाई की जाती है। इससे ग्रामीणों में यह धारणा बन रही है कि पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि पेयजल हेतु जारी अनुमति का उपयोग कहीं कृषि अथवा अन्य व्यावसायिक प्रयोजनों के लिए तो नहीं किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने रात में संचालित बोर खनन कार्यों पर प्रभावी निगरानी और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।


नियमों पर उठ रहे सवाल
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को पेयजल प्रयोजन के लिए अनुमति दी गई है तो उसका उपयोग उसी उद्देश्य के लिए होना चाहिए। अनुमति की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकता है। ऐसे मामलों में स्थल निरीक्षण, उपयोग की वास्तविक स्थिति और अनुमति की शर्तों की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पूरे मामले में संबंधित विभाग द्वारा मौके का समुचित निरीक्षण नहीं किया गया। उन्होंने मांग की है कि अनुभागीय अधिकारी (राजस्व) पथरिया रेखा चंद्रा, तहसीलदार सरगांव अतुल वैष्णव तथा संबंधित राजस्व अमले द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि क्षेत्र के पटवारी शिवम नाग से भी इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

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